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 कहानियां ! कहानियां सुनना किसे पसंद नही , हर कोई सुनना पसंद करता है , बस शर्त इतनी की कहानी अच्छी होनी चाहिए । सब की अपनी अपनी एक कहानी होती है । आज हम बात करने वाले हैं बच्चों की कहानियों के बारे में ! 


बच्चे जितना कहने से नही सीखते उससे ज्यादा वह कहानियों के माध्यम से सीखते हैं । पहले के समय मे सब सयुक्त परिवार में रहते थे । बच्चों की जिम्मेदारी दादा या दादी संभालते थे । दादी दादा बच्चों को घुमाने ले जाते थे , बाजार में ले जाते थे , रिस्तेदारो के घर ले जाते थे , खेत मे ले जाते थे ....यू कहे कि बच्चों का बचपन दादा दादी की छांव में फलता फूलता था । एक तरह से बुजुर्ग बच्चों का घड़तर करते थे  । लेकिन आज सब कुछ बदल गया है । आज घर मे मम्मी पापा और बच्चा होता है । दोनों काम पर चले जाते हैं । और बच्चा अकेला रह जाता है । गांवो में अभी भी बड़े बड़े परिवार दिख जाते हैं । लेकिन शहरों में अब छोटे परिवार रह गए हैं । जिससे बच्चे का बचपन खालीपन में पलता है । ना कोई मार्गदर्शन ना कुछ ! बस उनको कमरे में सोफे , टीवी और दूसरी सुविधा के साथ छोड़ दिया जाता है । 

 

लेकिन इसके कई सारे पहलू है , आज हम उनकी बात ना करते हुए आज हम लेकर आये है कहानियां ! स्मार्टफोन में कहानियां देखना आज जैसे जरूरत सा बन गया है। इन डिस्प्ले में कहानी देखने मे वह मजा नही जो दादाजी या दादी की गोद मे बैठकर उनसे कहानी सुनने में जो मजा आता है । वह बात ही अलग होती है । अगर आप दादा दादी के साथ है तो हम कहना चाहते हैं कि स्मार्टफोन को गोली मारो और उनसे कहानियां सुनो ! ज्यादा मजा आएगा ! हालांकि वे ना हो तो आप इस स्मार्टफोन का सहारा ले सकते हैं । 

 कक्षा 1 के बच्चों के 10 कहानियां इस फ़ाइल में है ! 

बस क्लिक करे , फाइल खोले और मजा ले कहानियों का !! 

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